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    [ Marathi shayari On Holi ]



 | Marathi shayari On Holi |



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आज होळीला कशाला हिंडशी बेकार पांडू?
जो तुला भेटेल नेता,त्यास जोडे मार पांडू

आजची न्यारीच होळी ! पाज तू साहित्यिकांना
तेवढा नाहीस का तू काय 'दर्जेदार' पांडू?

ही महागाई अशी अन् ही कशी होळी कळेना,
बोंबले हा देश सारा,बोंब तूही मार पांडू...


सुरेश_भट


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अंग अंग चिंब रंग खेळलो असा गडे 
की स्मरेल हीच रंगपंचमी क्षणोक्षणी


©अमित वाघ


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आयुष्याची होळी करतो
नंतर गरीब दिवाळी करतो


©अरविंद उन्हाळे


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पेटली ह्रदयात होळी आजही
घेरुनी आली उदासी आजही

©अनंत ढवळे



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गरीबाच्या लग्नाला नवरी गोरी काय, काळी काय,
महागाईने पिचलेल्याला होळी काय, दिवाळी काय


©ए.के.शेख.



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तुझी बनून राहता तुझाच रंग लागला,
अजून आणखी कशास रंग पाहिजे मला


©अन्वी आठलेकर


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पोटासाठी आयुष्याची झोळी होते
कधीकधी तर अब्रूचीही होळी होते


©आनंद पेंढारकर


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येऊ नये कधीही शिमगा तुझ्या घरावर
मी त्या मुळेच केली होळी जुन्या स्मृतीची.


©आत्माराम जाधव


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ती भेटलीच नाही ,होळी तशीच गेली
मज हळद काल ओली, लाऊन मात्र गेली 


©अरविंद पोहरकर


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ती पेटवून होळी जाळून या मनाला 
मी आर्तता मनाची रंगात बुडवलेली 


©अलका देशमुख


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भरवसा कोठे तसाही कोणत्या विस्तवाचा
तशी होळी की दिवाळी सांगता येत नाही.


©बाळ पाटील



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निळसर डोळे,लाल ओठ अन गाल गुलाबी 
तिला वेगळी रंगपंचमी हवी कशाला 


© गोविंद नाईक


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रंगात एका रंगुनी जाऊ चला 
ही जात धर्मांची इथे धुळवड नको


©हेमलता पाटील


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रोज उत्सव नसे,रोज शिमगा नसे
तू अशी रोज रंगात येऊ नये


©कलीम खान

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एका एका स्वप्नांची मी मोळी केली 
पोटासाठी त्या सगळ्यांची होळी केली .

भेद अजुनही वर्णाचा मिटलेला नाही 
रंगपंचमी,धुळवड केली होळी केली


©विशाल राजगुरू



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पहा ऐकले मी जनाचे परंतू, मनाच्याच रंगात मी रंगले
तरी जाहली वाटते का मनाची नव्याने पुन्हा आज धुळवड किती


©Prajakta Gokhale -


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आठवांचा दिवसभर शिमगा असे
रोज दु:खांची असे कोजागिरी


©रणजीत पराडकर


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पेटली होळी सुखाची
आत अंधारून आले.


©रत्नमाला शिंदे.


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येते तशीच जाते होळी असो दिवाळी
आता इथे सणांची उरली कुठे नवाई ?


©रुपेश देशमुख


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घराची जाहली आहेच होळी मागच्या साली 
तरीही रंग होळीचे पुन्हा खेळायचे आहे


©राधिका


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रंगपंचमी जवळी येता जखमेवरची खपली निघते
जुन्या नकोशा आठवणींची ह्रदयामध्ये होळी जळते


©सुनंदा पाटील


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नको झालाय शिमगा नेहमीचा
तुझ्या सोबत सणाची हौस फिटली


©स्वप्निल शेवडे


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दुःख चिंता प्रेम मत्सर यासवे लढतोस तू
रंगुनी रंगात साऱ्या कोरडा उरतोस तू


© सुप्रिया मिलिंद जाधव


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कुणाची आर्त किंकाळी? कसा आवाज हा आला?
कशी ही पेटली होळी? नभाला झोंबती ज्वाला.


© श्रीकृष्ण नारायण राऊत


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जे धर्माचा शिमगा करती,
त्या बैलांचा पोळा झाला


©डॉ. संतोष कुलकर्णी


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कोणत्या रंगास नाकारू अता मी ?
जीवना भलती तुझी रंगीत होळी


©संजय गोरडे


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बोंब असते नेहमीची, 'श्रावणा'च्या दुष्मनांची
खेळती घाणीत होळी, मग धुलीवंदन कशाला


@ 'श्रावण'( शंकर पाटील )



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कैफाचा जल्लोष म्हणू की उत्सव होता प्रेमाचा 
रंगपंचमी तारुण्याची, तुला न चुकली मला न चुकली 


@उज्वला मुडप्पू


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होळीत रंगला ना माझ्यासवे कधी तू
करशील जी दिवाळी अपुल्याच अंगणी कर


©विजय उतेकर.


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झाडांमुळेच टिकून इथला निसर्ग आहे
झाडे तोडुन आपण दसरा होळी केली 


©विनायक पाटील



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परस्परांच्या नावाने कायमचा शिमगा
ही स्पर्धेची खाज कशी जिरवावी सांगा ?


© विश्वास कुलकर्णी


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रंग माझा वेगळा झाला गुलाबी
मी तुझ्या रंगात न्हाली छान झाले


©वैश
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